धर्मशाला में राष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान हिमाचल की डिजिटल पहलों को किया रेखांकित, शिक्षा, स्वास्थ्य और ग्रामीण अर्थव्यवस्था में व्यवस्था परिवर्तन पर दिया जोर
धर्मशाला। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि डिजिटल गवर्नेंस का वास्तविक उद्देश्य आम नागरिकों को सरल, त्वरित, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित सेवाएं उपलब्ध करवाना है। ई-गवर्नेंस की सफलता तकनीकी जटिलताओं में नहीं, बल्कि दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों सहित समाज के हर वर्ग का जीवन आसान बनाने में निहित है।
मुख्यमंत्री शनिवार को धर्मशाला में प्रशासनिक सुधार एवं ई-गवर्नेंस विषय पर आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार पारंपरिक नौकरशाही व्यवस्था से आगे बढ़कर पारदर्शी और जवाबदेह शासन प्रणाली स्थापित करने की दिशा में कार्य कर रही है। सरकार का उद्देश्य हिमाचल प्रदेश के संसाधनों का लाभ आम जनता तक पहुंचाना और प्रदेश को आत्मनिर्भर एवं समृद्ध बनाना है।
शिक्षा और स्वास्थ्य सरकार की प्राथमिकता
मुख्यमंत्री ने कहा कि शिक्षा क्षेत्र में सुधार के लिए प्री-नर्सरी से 12वीं कक्षा तक विशेष प्रयास किए गए हैं। इनके परिणामस्वरूप हिमाचल प्रदेश शिक्षा के क्षेत्र में देशभर में पांचवें स्थान पर पहुंचा है, जबकि वर्ष 2021 में प्रदेश 21वें स्थान पर था।
स्वास्थ्य क्षेत्र में रोबोटिक सर्जरी की सुविधाएं शुरू करने, पुराने चिकित्सा उपकरणों को बदलने, स्नातकोत्तर सीटें बढ़ाने तथा विशेषज्ञ चिकित्सकों के वेतन में वृद्धि जैसे कदम उठाए गए हैं। इससे प्रदेशवासियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने और इलाज के लिए दूसरे राज्यों पर निर्भरता कम करने में मदद मिल रही है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश की लगभग 90 प्रतिशत आबादी ग्रामीण क्षेत्रों में रहती है। इसलिए ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना सरकार की प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। सरकार ने गाय और भैंस के दूध के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित करने के साथ प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया है। प्राकृतिक खेती से उत्पादित गेहूं 80 रुपये, कच्ची हल्दी 150 रुपये, मक्का 50 रुपये और अदरक 30 रुपये प्रति किलोग्राम की दर से खरीदा जा रहा है।
डिजिटल सेवाओं से बढ़ी जवाबदेही
मुख्यमंत्री ने कहा कि सिंगल विंडो सिटीजन पोर्टल के माध्यम से नागरिक घर बैठे या लोक मित्र केंद्रों के जरिए विभिन्न सरकारी सेवाओं का लाभ उठा रहे हैं। मुख्यमंत्री हेल्पलाइन और शिकायत निवारण पोर्टल से प्रशासनिक जवाबदेही बढ़ी है। शिकायतकर्ता की संतुष्टि के बिना शिकायत को निस्तारित नहीं माना जाता।
राजस्व मामलों में पारदर्शिता लाने के लिए राजस्व प्रबंधन प्रणाली और राजस्व लोक अदालतों के माध्यम से इंतकाल, भूमि बंटवारे और निशानदेही से जुड़े लंबित मामलों के निपटारे में तेजी लाई गई है।
सामाजिक सुरक्षा और हरित हिमाचल पर विशेष ध्यान
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार निराश्रित बच्चों को ‘चिल्ड्रन ऑफ द स्टेट’ के रूप में अपनाकर उनकी शिक्षा, पालन-पोषण, उच्च शिक्षा, कोचिंग, विवाह और आवास जैसी जरूरतों का ध्यान रख रही है। इसके अलावा, निर्धारित आय सीमा वाले परिवारों के विद्यार्थियों को देश-विदेश में पढ़ाई के लिए एक प्रतिशत ब्याज दर पर 20 लाख रुपये तक ऋण सुविधा प्रदान की जा रही है।
उन्होंने हरित हिमाचल के लक्ष्य का उल्लेख करते हुए इलेक्ट्रिक बसों को बढ़ावा देने और पर्यावरण संरक्षण के लिए उठाए जा रहे कदमों की जानकारी दी।
पहाड़ी राज्यों के हितों पर न्यायसंगत विचार की मांग
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के वन, नदियां और जलविद्युत संसाधन देश की पर्यावरणीय एवं ऊर्जा सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। इसके बावजूद प्राकृतिक आपदाओं से निपटने और पर्यावरण संरक्षण का असंगत बोझ राज्य को उठाना पड़ता है। उन्होंने जलविद्युत परियोजनाओं, रॉयल्टी, जल उपकर और केंद्रीय वित्तीय सहायता जैसे मामलों में पहाड़ी राज्यों के हितों पर न्यायसंगत विचार करने की आवश्यकता पर बल दिया।
उन्होंने आशा व्यक्त की कि राष्ट्रीय सम्मेलन से डिजिटल शासन की बेहतर कार्यप्रणालियों को साझा करने और प्रौद्योगिकी का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
सम्मेलन में भारत सरकार के प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग की सचिव निवेदिता शुक्ला वर्मा, हिमाचल प्रदेश के मुख्य सचिव कमलेश कुमार पंत सहित वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों और विशेषज्ञों ने भी विचार रखे। इस अवसर पर कृषि मंत्री प्रो. चंद्र कुमार, ग्रामीण विकास मंत्री अनिरुद्ध सिंह, आयुष मंत्री यादविंद्र गोमा, पर्यटन विकास बोर्ड के अध्यक्ष आर.एस. बाली, मुख्यमंत्री के प्रधान सलाहकार गोकुल बुटेल सहित अनेक जनप्रतिनिधि और अधिकारी उपस्थित रहे।

