शिमला। किशाऊ बांध परियोजना को लेकर हिमाचल सरकार और प्रदेश के हितों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण समझौता हुआ है। मुख्यमंत्री ने इसे हिमाचल के इतिहास का ऐतिहासिक दिन बताते हुए प्रदेश के हक की जीत करार दिया है।
मुख्यमंत्री के अनुसार, पिछले करीब तीन वर्षों से सरकार किशाऊ बांध परियोजना को लेकर हिमाचल के हितों की मजबूती से पैरवी कर रही थी। सरकार का स्पष्ट रुख रहा कि प्रदेश के प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग होने की स्थिति में हिमाचल की जनता को उसका उचित लाभ मिलना चाहिए।
मुख्यमंत्री ने पूर्व भाजपा सरकार की नीतियों और फैसलों पर सवाल उठाते हुए कहा कि पिछली व्यवस्था के कारण 211 मेगावाट बिजली के लिए हिमाचल पर करीब 3,000 करोड़ रुपये का वित्तीय बोझ पड़ने वाला था। मौजूदा सरकार ने इस व्यवस्था को स्वीकार करने से इनकार किया और प्रदेश के हितों को प्राथमिकता देते हुए लगातार बातचीत और संघर्ष जारी रखा।
सरकार के मुताबिक, नए समझौते के बाद हिमाचल प्रदेश को बिना कोई निवेश किए हर वर्ष करीब 1,200 से 1,500 करोड़ रुपये की आय प्राप्त होने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि यह महज एक समझौता नहीं, बल्कि हिमाचल के प्राकृतिक संसाधनों पर प्रदेश के अधिकार और जनता के हितों की जीत है। उन्होंने कहा कि यह फैसला उन नीतियों का भी जवाब है, जिनमें पूर्व में हिमाचल के हितों से समझौता किया गया।
किशाऊ बांध परियोजना पर हिमाचल के हितों की बड़ी जीत, बिना निवेश हर साल मिलेगा 1,500 करोड़ तक का राजस्व

